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Friday, January 13, 2017

इन आयुर्वेदिक तरीकों से बढ़ाएं आँखों की रौशनी




  • सुबह उठकर मुह मे पानी भरकर  आँखें खोलकर साफ पानी के छींटे  आँखों मे मरने चाहिए इससे  आँखों की नजर बढ़ती है|
  • बालों पर रंग ,हैयर डाई और केमिकल शेम्पू लगाने से परहेज करें|  ये चीजें आँखों की रोशनी घटाती हैं|
  • सुबह खाली पेट आधा चम्मच मक्खन आधा चम्मच  पीसी हुई मिश्री  और 5 पीसी हुई काली मिर्च मिलाकर चाट लें|  तत्पशचात कच्चे नारियल की गिरी के 2-3 टुकड़े भली भांति चबाकर  खाएं|  फिर थौड़ी  सी सौंफ चबाकर खाएं| 2-3 माह तक यह उपाय करने से दृष्टि  तेज हो जाती है|
  • रात को एक चम्मच त्रिफला चूर्ण  एक गिलास पानी डालें| सुबह उठकर छानकर  इस पानी से  आँखें धोएँ|  इससे नेत्र ज्योति  बढ़ती है | और आँखों के कई रोग नष्ट होते हैं|
  • सरसों के तेल से पैरों के तलवों की मालिश करना चाहिए|  नहाने से 15 मिनिट पहिले पेरों के अँगूठों को सरसो के तेल  मे  तर कर लें |  आँखों की ज्योति लंबे समय तक कायम रखने मे मददगार उपाय है|
  • 10 ग्राम छोटी हरी ईलायची ,20 ग्राम सौंफ के मिश्रण को  महीन पीसकर काँच की शीशी मे भर लें| एक चम्मच मिश्रण दूध के साथ लेते रहने से नजर तेज हो जाती है|
  • अंगूर नियमित रूप से खाएं | इससे रात मे देखने की शक्ति बढ़ती है|
  • एक चम्मच त्रिफला चूर्ण,एक चम्मच शहद  और दो चम्मच गाय के घी को भली प्रकार मिश्रित  करें  इसे रात को सोते वक्त चाट लें| इससे नेत्र रोग दूर होते हैं,नजर तेज होती है और शारीरिक कमजोरी  मे भी लाभदायक है|
  • एक चम्मच मुलेठी का चूर्ण,एक चम्मच शहद  आधा चम्मच देसी घी  को भली प्रकार मिश्रित कर  एक पाव दूध के साथ सुबह शाम 3  माह तक सेवन करने से  दृष्टि  तेज होती है|
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काले घेरों का सबसे सफल इलाज़ सिर्फ हेल्थ बीके पर

आँखों के नीचे डार्क सर्कल/काले घेरे पड़ने से चेहरे की खूबसूरती आधी रह जाती है| चिकित्सा विज्ञानियों के अनुसार जब भी हमारे शरीर मे केल्शियम और लोह तत्व की कमी हो जाती है तो आँखों के नीचे काले घेरे पड़ने लगते हैं|  आइरन और केल्शियम की कमी के अलावा आज की जीवन शैली भी डार्क सर्कल के लिए उत्तरदायी है|  आँखों के काले घेरों को ठीक करने के लिये निम्न घरेलू उपचार अपनाएं



  • बादाम के तेल से मालिश करें

बादाम मे प्रचुर मात्रा मे विटामिन ई पाया जाता है यह आँखों के नीचेडार्क सर्कल के लिए बेहद फायदेमंद रहता है| बादाम का तेल काले
घेरों पर लगाएँ फिर उंगली से हल्की मालिश करें| रात भर इसे लगा रहने देंऔर सुबह ठंडे पानी से धो लें | काले घेरे पूरी तरह से साफ होने तक यह

  • पुदीना से  दें आँखों को ठंडक

पुदीना आंख जोन के न्रीचे काले घेरों को दूर करने की बेहतर औषधि है|ठंडी तासीर का होने की वजह से पुदीना आँखों को ठंडक पहुंचाता है|पहले पुदीने को भली प्रकार पीस लें फिर इसमे थोड़ा सा नींबू का रसमिलाएँ इस मिश्रण को आँखों के नीचे 10 से 15 मिनिट तक लगा रहनेदे फिर पानी से धो लें यह लेप रोजाना दो तीन हफ्ते तक लगाने से बेहतर परिणाम मिलते हैं|

  • नींबू से धब्बे हटाएँ

1) नींबू के रस मे ककड़ी का रस मिलाएँ |इसे काले घेरों पर 10 से 15मिनिट तक लगाकर रखें और फिर पानी से धो लें| 2-3 हफ्ते मे फर्कदिखेगा| त्वचा का कालापन दूर होगा| ककड़ी की स्लाईस आँखों पररखने से भी जबर्दस्त फायदा होता है
2) कभी आपको ककड़ी ना मिले तो आप नींबू के रस को रुई के फाये से काले घेरे पर 10 मिनिट लगाकर फिर पानी से धो लें| हाँ नींबू के रससे किसी को जलन होती हो तो वे इस प्रयोग को न करें|

  • आलू का प्रयोग

आलू काले घेरे दूर करने मे प्राकृतिक ब्लीच का काम करता है| आलू को पतलाकाटकर उसे अपनीआंखों पर रख दें| या आलू का रस निकाल कर सूती कपड़े कीसहायता से काले घेरों पर लगाएँ और उस कपड़े सेआंखों को 15 मिनिट के लिए ढक दें| दिन मे दो बार यह प्रयोग करने से2 हफ्ते मे काले घेरे खत्म होगे|
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Thursday, January 12, 2017

आँखों के फ्लूइड को बिना आँख ड्राप उपयोग के प्राकृतिक रूप से कैसे बढाए

आज कल की दुनिया में सबसे सामान्य समस्या है सूखी आँखे (dry eyes)।  ये वो समस्या नहीं रही जो 40 से ऊपर के उम्र वाले लोग में उत्पन्न होती थी, आज कल ये 20 और 30 साल की उम्र से भी व्यक्ति में उत्पन्न होने लगी है। सूखी आँखे / ड्राई ऑय एक ऐसी समस्या है जो आँखों में कम फ्लूइड (eye fluid) उत्पन्न होने से बनती है जैसे ही टीयर ग्लैंड (tear gland) में टीयर्स बनाना कम हो जाते है या टीयर्स की क्वालिटी कम होती है, तब ये समस्या उत्पन्न होती है। सूखी आँखों से आपको दर्द भी होता है और साथ ही चिडचिडाहट भी और इसलिए नियमित समय से ऑय ड्राप (eye drop) के उपयोग से आपकी आँखों में फ्लूइड बनना शुरू होता है।

अगर आप केवल इस परिस्तिथि के शरुआती दौर पर है और अभी तक आपके लक्षण तीव्र नहीं बने है तो आप प्राकृतिक नुस्खो को अपनाकर अपने आँखों के फ्लूइड को बढ़ा सकते है और इस तरह सूखी आँखों की समस्या से छुटकारा पा सकते है। अगर ये दिए गए नुस्खे एक महीने में अपना असर / प्रभाव नहीं दिखाते है तो आपको ऑय स्पेशलिस्ट (eye specialist) के पास जाना होगा। इस आर्टिकल में ऐसे ही कुछ प्राकृतिक उपाय को दर्शाया गया है जिनका सही रूप से पालन करने से आप अपने आँखों के फ्लूइड को प्राकृतिक रूप से बढ़ा सकते है।

नेत्र रोग – अपने आदतों को बदले (Change your habits)

सबसे आसान तरीका और प्रभावशाली रूप से आँखों के फ्लूइड को बिना ऑय ड्राप के बढाने का तरीका ये है की आप अपनी उन आदतों को दूर कर दें जिनसे आपकी आँखों को क्षति पहुँचती है। नीचे दिए गए चीज़ों का पालन  कर आप एक हफ्ते में बेहतर परिणाम को देख सकेंगे,

आँखों के रोग में प्रबुद्ध स्क्रीन को घंटो तक तकना बंद करें (Stop staring at an illuminated screen for hours)

ज्यादातर लोग जो आँखों में कम फ्लूइड की समस्या से गुज़र रहें है उसका कारण ये है की वे अनेक गैजेट (gadget) जैसे कंप्यूटर, मोबाइल, टैब्स (tabs), लैपटॉप और टेलीविज़न (television) का उपयोग करते है। हम सबको एक ऐसी आदत लग गयी है की हम सभी प्रबुद्ध स्क्रीन (illuminated screen) पर ज्यादा समय तक तकते रहते है या एक डिवाइस (device) पर घंटो तक देखते रहेंगे। इन स्क्रीन से निकलने वाली रेस/ किरणे हमारी आँखों को सूखा बनाती है और यही सबसे मुख्य कारण है।
अगर आपकी आँखों में कम फ्लूइड बनता है और अप इसका इलाज ऑय ड्राप के बिना करना चाहते है तो सब से पहले आपको स्क्रीन पर बिताए जाने वाले समय को कम करना होगा। ये ध्यान रखें की लगातार आप अपने प्रबुद्ध स्क्रीन पर 20 मिनट तक ना तकते रहें। हर 20 मिनट के बाद अपनी आँखों को 2 मिनट का ब्रेक प्रदान करें।

पलक को नियमित समय से झपकते रहें (Blink often)

हम कभी कुछ काम में इतना व्यस्त हो जाते है की पलक झपकना भी भूल जाते है। लैपटॉप पर महत्वपूर्ण काम करते दौरान या दोस्तों के साथ बातें करते समय या किताब में कुछ ख़ास पढ़ते समय हम अपनी आँखों को झपकना भूल जाते है। क्या आप जानते है की आँखों को कम झपकने से आपकी आँखों पर बुरा प्रभाव पड़ता है और इस से आपकी आँखे सूखी पड़ सकती है। इसलिए ये ध्यान रखें की आप कुछ भी कर रहे हो वो फरक नहीं पड़ता लेकिन अपनी आँखों को समय- समय पर झपकाते रहें। आँखों को झपकाने से आप अपने आँखों के फ्लूइड को फैलाते है और इस तरह आँखों को सूखा पड़ने से रोकते है।

अँधेरे में प्रबुद्ध स्क्रीन को ना ताके (Do not stare at an illuminated screen in the dark)

ज्यादातर लोग अँधेरे में लैपटॉप और स्मार्ट फ़ोन पर काम करना पसंद करते है। लेकिन क्या आपको पता है की अँधेरे में प्रबुद्ध स्क्रीन पर तकने से आपकी आँखों पर दबाव बनता है और इस तरह आँखे सूखी पड़ने लगती है। इसलिए अगर आपकी आँखों में कम फ्लूइड बनता है तो आपको इस अँधेरे में प्रबुद्ध स्क्रीन को तकने की आदत को दूर करना होगा। ये भी ध्यान रखें की आप अपने स्क्रीन को अपनी आँखों से दूर रखें और ज्यादा उज्ज्वल भी ना रखें, जिस से आँखों पर दबाव पड़ सकता है।

नेत्र रोग घरेलू उपचार आँखों पर बार- बार पानी को छिडकें (Splash clean water on your eyes frequently)

अपनी आँखों पर पानी छिडकने से आपकी आँखों को बहुत ही लाभ प्राप्त होता है जो आपने सोचा भी नहीं होगा। पानी एक महत्वपूर्ण पदार्थ है जिसकी सहायता से आप अपनी आँखों में स्नेहन (lubrication) को बढ़ा सकते है। पानी से आप अपनी आँखों पर कम दबाव डालते है और इस तरह ये आपकी आँखों पर बिना कोई हानि पहुंचाए साफ़ करता है और साथ ही आँखों को किसी भी प्रकार से सूखा नहीं पड़ने देता है। जब भी आपकी आँखों पर कोई भी दबाव महसूस हो तो आप एक साफ़ साधारण पानी को अपने चेहरे पर छिड़क लें और इस तरह आपकी आँखे फ्रेश हो जायेंगी और इस तरह आँखों को सूखा पड़ने से भी रोक सकेंगे।

आँखों की देखभाल – आँखों को आराम दें (Rest your eyes)

अपनी आँखों को नियमित समय से आराम देना भी एक आसान और प्रभावशाली तरीका है जिस से आप अपनी आँखों को ड्राई पड़ने से रोक सकते है और इस तरह अपनी आँखों में फ्लूइड को बढ़ा सकते है। ध्यान रखें की आप 8 घंटे तक सोए और इस तरह अपनी आँखों को सही से आराम प्रदान करें। अगर आप निद्रा नहीं ले रहे है तब भी आप अपनी आँखों को हर 20 मिनट के काम के बाद 5 मिनट के लिए बंद कर आराम प्रदान करें। ये आँखों में आंसू को बढ़ाएगा और इस तरह आँखों के फ्लूइड को बढ़ाएगा और सूखी पड़ने से रोकेगा।

अपने वातावरण को बदले (Change your environment for aankhon ki dekhbhal)

ड्राई ऑय, वातावरण के कारण भी उत्पन्न हो सकती है। ठंडी और हवा से भरपूर वातावरण से आपकी आँखों पर असर पड़ता है और इस तरह आँखों में फ्लूइड कम उत्पन्न होता है। अगर आपकी आँखों में कम फ्लूइड उत्पन्न होता है तो आपको अपने वातावरण पर ध्यान देना चाहिए और उस अनुसार आपको बदलाव को लाना चाहिए।

घर में ह्यूमिडफाइअर का उपयोग करें (Use a humidifier in your home)

वातावरण में सूखापण (dryness) होने से भी आँखे सूखी पड़ सकती है इसलिए ध्यान रखें की आपके वातावरण में सूखापन ज्यादा ना हो या आप अपना ज्यादा समय एयर कंडीशन में बिताते है तो, वातावरण को सूखा पड़ने से रोकने के लिए ह्यूमिडफाइअर (humidifier) का उपयोग करें। इस तरह आप अपने वातावरण को पूर्ण तरह से सूखा पड़ने से रोक सकते है और अपनी आँखों को ड्राई पड़ने से बचा सकते है।

आँखों में दर्द – अपनी आँखों को तेज़ हवा और कड़ी धुप से ढक कर रखें (Cover your eyes from harsh wind and sun)

तेज़ हवा और सूरज की कड़क किरणों से आँखों को क्षति पहुँच सकती है और इसलिए आपको सूखी आँखों की समस्या से गुज़रना पड़ता है। इसलिए इन समस्या से छुटकारा पाने के लिए आपको अपनी आँखों को तेज़ हवा और सूरज की हानिकारक किरणों से सुरक्षित रखना होगा। अगर आप गतिविधियाँ जैसे मोटरसाइकिल चलाना या राइडिंग करना करते है तो आपकी आँखों पर तेज़ हवा का प्रभाव पड़ सकता है जिस से आँखों से सम्बंधित समस्या जैसे सूखी आँखे और कम फ्लूइड बनना उत्पन्न हो सकता है, इसलिए ये सब गतिविधियाँ करते समय अपनी आँखों को गॉगल्स (goggles) से अच्छे से ढक कर रखें। साथ में ये भी ध्यान रखें की सूरज की किरणों में निकलने से पहले अच्छे सनग्लास्सेस (sunglasses) का उपयोग करे ताकि हानिकारक किरणों से आपकी आँखों को कोई क्षति नहीं पहुँच सकें।

सिगरेट के धुएँ से दूर रहे (Stay away from cigarette smoke)

रिसर्च के अनुसार आँखों के कम फ्लूइड बनना और सूखी आँखों का कारण सिगरेट का धुएँ ( cigarette smoke ) है। अगर आप धूम्रपान करते है तो सबसे पहले आपको इस आदत से छुटकारा पाना होगा। ये भी ध्यान रखें की आप जहाँ रहते है वहाँ का वातावरण भी सिगरेट के धुएँ से मुक्त रहे। इसलिए धूम्रपान वाली जगह पर ना जाए या वहाँ ना जाए जहाँ लोग ज्यादा धूम्रपान कर रहे होते है।

अपने आहार पर ध्यान दें (Check out your diet)

पूरे शरीर के स्वास्थय के लिए रोजाना का आहार एक महत्वपूर्ण चीज़ है। अगर आपको अपनी आँखों का फ्लूइड प्राकृतिक रूप से ज्यादा बढ़ाना है वो भी ऑय ड्राप का उपयोग करे बिना तो आपको अपने रोजाना के आहार पर ध्यान देना होगा।

विटामिन A से भरपूर खाने को खाए (Eat vitamin A rich foods)

आँखों के स्वास्थय के लिए और रौशनी के लिए सबसे महत्वपूर्ण किरदार विटामिन A निभाता है। अगर आप ड्राई ऑय और आँखों में कम फ्लूइड की समस्या से गुज़र रहें है तो आपको अपने आहार में विटामिन A से भरपूर पदार्थ को मिलाना चाहिए। इस तरह इनको रोजाना अपने आहार में मिलाकर खाने से आप अपने आँखों को स्वस्थ बनाते है। गाजर, चकोतरा, पालक, खुबानी (apricot), सलाद के पत्तो (lettuce) में विटामिन A ज्यादा पाया जाता है। इसलिए इन रंगीन सब्जियों को अपने आहार में मिलाये और इस तरह अपने शरीर में विटामिन A को बढाए और अपनी आँखों की सेहत एवं रौशनी को स्वस्थ बनाए रखें।

अपने आहार में ज्यादा ओमेगा 3 फैटी एसिड्स को मिलाये (Include more omega 3s in your diet)

रिसर्च के अनुसार अपने आहार में ज्यादा ओमेगा 3 फैटी एसिड (omega 3 fatty acid) मिलाने से आँखों से सम्बंधित समस्या जैसे ड्राई आँख और आँखों में कम फ्लूइड बनने से छुटकारा पाया जा सकता है। ओमेगा 3 फैटी एसिड को जलन दूर करने के लिए प्रभावशाली माना जाता है और ये आँखों में फ्लूइड को बढाता भी है और इस तरह आपकी आँखों से सम्बंधित समस्या को दूर करता है। ओमेगा 3 फैटी एसिड आंसू के भी क्वालिटी को सुधारता है जो टीयर ग्लैंड में बनता है। इस से सूखी आँखे और कम फ्लूइड की समस्या दूर हो जाती है।
अलसी का बीज (flax seeds), चिया के बीज, अखरोट (walnut) में ओमेगा 3 फैटी एसिड भरपूर होते है। इनके अतिरिक्त फैटी फिश जैसे सैल्मन (salmon), ट्यूना (tuna), मैकरील (mackerel) और सारडाइन (sardines) में भी ओमेगा 3 फैटी एसिड भरपूर भरे है। अन्डो में भी ओमेगा 3 फैटी एसिड पाया जाता है। इसलिए अपने रोजाना के आहार में ये पदार्थ को मिलाये और आँखों के फ्लूइड को प्राकृतिक रूप से बढाए।

कुछ घरेलु नुस्खे (Some home treatments)

ऑय फ्लूइड को बढाने में ग्रीन टी सहायक है (Green tea might help in increasing eye fluid)

ग्रीन टी में एंटी ऑक्सीडेंट (anti oxidant) ज्यादा ही पाया जाता है जिस से आप अपनी आँखों पर पहुंचे ओक्सीडेतिव (oxidative) की क्षति को कम कर सकते है। आप ग्रीन टी को रोजाना पी कर उनमे मौजूद एंटी ऑक्सीडेंट का भरपूर लाभ उठा सकते है जिस से आँखों से सम्बंधित समस्या का भी इलाज होता है जिसमे आँखों में ऑय फ्लूइड को बढ़ाया जाता है। आप चाहे तो हलके ग्रीन टी के छाने हुए पानी को ठंडे पड़ने के बाद भी इस से अपनी आँखों को धो सकते है और इस तरह ऑय फ्लूइड को बढ़ा सकते है।

करौंदा भी प्रभावशाली है (Gooseberry can be effective)

भारतीय करौंदा (indian gooseberry) में विटामिन A और विटामिन c भरपूर पाया जाता है। ताज़े भारतीय करौंदे से निकले एक्सट्रेक्ट में पानी मिलाये और इस से आप अपने अनेक प्रकार के आँखों से सम्बंधित समस्या का इलाज कर सकते है जैसे की सूखी आँखे और आँखों में फ्लूइड का कम उत्पन्न होना। ताज़े करौंदे का एक्सट्रेक्ट निकाले और इसमें शुद्ध पानी को मिलाये। अब इस मिश्रण को आँखों पर छिडकें। बेहतर परिणाम पाने के लिए इसका उपयोग दिन में 1 से 2 बार रोजाना करें।
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Wednesday, January 11, 2017

मोबाइल के बुरे प्रभावों से आँखों को कैसे बचाएं

क्या आप थकान और आँखों में सूखेपन जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं? और क्या आपको इन दिनों आँखों के आस पास काले घेरे या डार्क सर्कल्स ज़्यादा दिखाई दे रहे हैं? क्या आपको लगातार कुछ समय तक सिर में दर्द का अनुभव हो रहा है जिसकी वजह से आपको  अपने रोजमर्रा के कामों को बेहतर तरीके से करने में असुविधा हो रही है, तो हम आपको बता दें कि, हो सकता है यह समस्या ज़्यादा देर तक मोबाइल के संपर्क में रहने की वजह से हो रही है। मोबाइल की स्क्रीन में हाइ एनर्जी विज़िबल लाइट (high energy visible light) होती है जिसे सामान्य भाषा में ब्लू लाइट (blue light) कहा जाता है। हाइ एनर्जी विज़िबल लाइट कम दूरी की तरंगों के रूप में आँखों के टिश्यूज़ (tissues) को नुकसान पहुंचा सकते हैं। स्टडी में यह प्रमाणित हुआ है कि, ब्लू लाइट या अधिक सामना करने पर रेटिना के उत्तकों को क्षति पहुँचती है जो आँखों में धुंधलापन या अन्य दृष्टि दोषों के समतुल्य है। तो इस बात से यह सिद्ध होता है कि, मोबाली आँखों की सेहत के लिए बहुत नुकसानदायक है। अंधत्व या आँखों के रोग का यह एक मुख्य कारण है। तो अब आप जान गए हैं कि आँखों को नुकसान पहुंचाने के पीछे इन मोबाइल्स की कितनी बड़ी भूमिका है वैसे तो एलईडी बल्ब और सूर्य की रोशनी में भी ये ब्लू लाइट उपस्थित होती है पर इनके संपर्क में हम लगातार नहीं रहते और न ही लगातार एकटक देखते रहते हैं इस मुक़ाबले मोबाइल का प्रयोग हम लगातार लंबे समय टक करते हैं, तो अब आपको अपने मोबाइल के प्रति थोड़ा और जागरूक होने की ज़रूरत है। आज के आधुनिक में सुविधा के साथ अपने कामों को भी आसान करने के लिए मोबाइल एक बहुत बड़ी ज़रूरत बन्न चुका है इसे त्यागना हमारे लिए लगभग नामुमकिन है, पर आँखों की सुरक्षा के लिए कुछ खास उपाय अपनाकर हम इस खतरे को कुछ हद तक कम कर सकते हैं।

आज मोबाइल के बिना रहना बहुत मुश्किल है तो कुछ खास सावधानियों को ध्यान में रखकर मोबाइल से होने वाले बुरे प्रभावों को कम किया जा सकता है इसके लिए हमे अपनी कुछ आदतों में खास बदलाव करने की भी ज़रूरत है।
मोबाइल पर बिताने वाले समय की सीमा को कम कर इस दिशा में पहला कदम उठाया जा सकता है। अगर आप बहुत ज़्यादा समय तक या देर तक मोबाइल में व्यस्त रहते हैं तो अपनी इस आदत को बदलने की कोशिश कीजिये। इस आदत के साथ ही बाकी आगे आने वाली आदतों को रोजाना के जीवन में शामिल करना आसान हो जाएगा। यह आपके आँखों की सुरक्षा के लिए एक बहुत महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।

आँखों की पलकों को जल्दी जल्दी झपकें (Blink frequently for mobile se aankhon ka bachaw)

पलकें झपकना एक प्राकृतिक क्रिया है जो आँखों को आराम देने के लिए ज़रूरी है। पलकें झपकाने से आँखों का तनाव भी कम होता है। जब हम मोबाइल का इस्तेमाल कर रहे होते हैं तो अक्सर पलकें झपकना भूल जाते हैं या सामान्य से कम बार हमारी पलकें झपकती हैं। जब हम मोबाइल पर कुछ कर रहे होते हैं तो आँखों में जलन और सूखापन महसूस होता है। आपको यह जानकार आश्चर्य होगा कि, कम पलके झपकाना आँखों की सेहत के लिए हानिकारक होता है इसके साथ ही आँखों में जलन और खुजली होती है। लगातार पलकें झपकाने से आप मोबाइल से निकलने वाली हाइ एनर्जी विज़िबल लाइट के हानिकारक प्रभावों को बहुत हद तक कम कर सकते हैं।

मोबाइल फोन इस्तेमाल करने के लिए समय सीमा निर्धारित करें (Divide your mobile time)

लगातार मोबाइल कि स्क्रीन कि तरफ एकटक देखने से कई प्रकार की आँखों से संबन्धित समस्याएँ हो सकती हैं जो आँखों की सेहत के लिए नुकसानदायक होती हैं। अगर आप इस समय सीमा को कम नहीं कर सकते तो इसे छोटे छोटे हिस्सों में बाँट लें और एक अंतराल लेते हुये मोबाइल का प्रयोग करें। कोशिश करें कि मोबाइल में बिताया जाने वाला आपका समय 20 मिनट से अधिक न हो। मोबाइल से कुछ दूरी बनाए रखें और हर 20 मिनट के बाद एक अंतराल लें, इस समय मोबाइल से दूर रहें या कुछ देर आंखे बंद करके आँखों को थोड़ा आराम दें। यह आपके आँखों की मांसपेशियों को रिलैक्स करने में मदद करेगा।

मोबाइल से सही दूरी बनाए (Maintain the right distance)

हमारी माँ हमेशा हमें सही सुझाव देती थी कि टीवी के ठीक सामने नहीं बैठना चाहिए और थोड़ी दूरी से टीवी की स्क्रीन को देखना चाहिए। बहुत पास से स्क्रीन को देखना आँखों के लिए नुकसानदायक होता है। ठीक इसी प्रकार मोबाइल का प्रयोग भी निश्चित दूरी से किया जाना बेहतर होता है।  सही लेवल और सही दूरी पर रखकर किया गया मोबाइल का उपयोग आँखों के खतरों को भी कम करने में मदद करता है और यह नियम केवल मोबाइल ही नहीं वरन पुस्तकों और अन्य दूसरी चीजों पर भी लागू होता है जिसे हम एकटक देखते हुये इस्तेमाल करते हैं। 8 इंच या इससे कम दूरी पर मोबाइल को रखकर इस्तेमाल करने से आँखों पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों की मात्रा भी ज़्यादा होती है। कभी भी कम से कम 16 इंच या 16 से 18 इंच तक की दूरी पर रखकर ही मोबाइल का प्रयोग किया जाना चाहिए।

मोबाइल रेडिएशन प्रोटेक्शन टिप्स : आँखों में बार बार पानी के छींटे मारे (Mobile radiation protection tips in Hindi : Splash your eyes with normal water frequently)

आँखों को साफ और सबसे आसान तरीके से सुरक्षित रखने के लिए यह उपाय सबसे आम और सरल है। पानी के छींटे मारने से आँखों का सूखापन दूर होता है और इसके साथ लंबे समय से काम करने की वजह से आँखों की थकान भी कम होती है। इस प्रयोग से आँखों की कुछ आम समस्या जैसे आँखों का धुंधलापन (blurred eyes) आदि कम होते हैं। अगर आप एकटक देखते हुये लंबे समय तक मोबाइल का इस्तेमाल करते हैं तो आपको बीच बीच में अंतराल लेकर आँखों में पानी के छींटे मारने चाहिए। यह आपकी आँखों की सेहत के लिए बहुत उपयोगी होता है साथ ही आँखों को होने वाले कई प्रकार के खतरों से भी बचाता है। आँखों को रोगों से बचाने के लिए यह एक आम तरीका है जिसे आसानी से प्रयोग में लाया जा सकता है।

मोबाइल स्क्रीन की चमक को कम करके रखें (Cell phone radiation protection products – Minimize the glare)

अगर आप मोबाइल के प्रयोग की समय सीमा को कम नहीं कर सकते तो आपकी आँखों की सुरक्षा के लिए यह बहुत ज़रूरी है कि, मोबाइल के ब्राइटनेस को कम कर के रखें। इसकी चमक या तेज रोशनी आँखों को जल्दी प्रभावित करती है। मोबाइल का प्रयोग करते समय हम इस बात को भूल जाते हैं कि इसकी तेज रोशनी हमारी आँखों पर कितना प्रभाव डालती है। वैसे आजकल नए स्मार्टफोंस आ गए हैं जिनकी स्क्रीन पर ग्लेयर प्रोटेक्टर का इस्तेमाल किया जाता है। अगर आप इस तरह के मोबाइल या स्मार्टफोन का प्रयोग करें तो आपकी आँखों कि सुरक्षा की दृष्टि से यह आपके लिए उपयोगी साबित हो सकता है। तो अपने आँखों को इस प्रकार के कष्ट से बचाने के लिए चमकरोधी ग्लास वाली स्क्रीन से बना मोबाइल इस्तेमाल करें।

ब्राइटनेस और कनट्रैस्ट को संतुलित रखें (Adjust the brightness and contrast of the screen)

मोबाइल की स्क्रीन का ब्राइटनेस (brightness) और कनट्रैस्ट (contrast) आँखों पर पड़ने वाले रेडिएशन के दुष्प्रभावों को कम करने में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इन्हें आरामदायक बनाए रखें। अत्यधिक या अत्यंत कम ब्राइटनेस दोनों ही आँखों पर बुरा प्रभाव डालते हैं। ज़्यादा कनट्रैस्ट चीजों को सटीक और बहुत साफ दिखाने में तो मदद करता है पर इससे आँखों पर तनाव भी ज़्यादा पड़ता है। इसीलिए स्क्रीन के ब्राइटनेस और कनट्रैस्ट दोनों को ही सही स्थिति में रखें ताकि आपकी आँखों पर ज़ोर न पड़े और आँखों को ज़रूरत के अनुसार आराम भी मिलता रहे। आँखों को रेडिएशन से बचाने के लिए यह उपाय बहुत ज़्यादा आवश्यक है। तो अगली बार जब भी मोबाइल इस्तेमाल करें उससे पहले यह सुनिश्चित कर लें कि आपके मोबाइल या स्मार्टफोन का ब्राइटनेस और कनट्रैस्ट बिलकुल संतुलित है और आपकी आँखों को कम से कम क्षति पहुँच रही है।

मोबाइल की नियमित साफ सफाई पर ध्यान दें (Take the best care to keep your mobile screen clean)

मोबाइल से निकलने वाली नीली रोशनी के रेडिएशन हमारी आँखों का तनाव बढ़ाकर अन्य समस्याएँ भी पैदा कर देते हैं। आंखों का सूखापन, जलन खुजली आदि आम समस्या हैं। यह सब मोबाइल के दुष्परिणाम हैं। पर इन सब के अलावा कुछ और वजह भी है जो मोबाइल के असावधानीपूर्ण तरीके से किए जाने वाले इस्तेमाल को ज़्यादा खतरनाक बना देती है। आँखों की सुरक्षा के लिए मोबाइल संबंधी कई टिप्स ऊपर दिये जा चुके हैं इनके अलावा एक खास बात का भी ध्यान रखना बहुत ज़रूरी होता है। आप जिस मोबाइल का प्रयोग अपने नियमित कामों के लिए कर रहे हैं उसकी साफ सफाई का भी खास ध्यान रखें। मोबाइल हर वक्त हमारे हाथ या जेब में होता है यहाँ तक की बस या ट्रैवल करते समय भी मोबाइल को हम अपने साथ रखते हैं, इस दौरान न जाने कितने जीवाणु हमारे मोबाइल के संपर्क में आते हैं और उसी में रह जाते हैं। जिन हाथों से हम मोबाइल का प्रयोग करते हैं उन्हीं हाथों से चेहरे या आँखों को यह कई तरह की बीमारियों के वाहक होते हैं इसीलिए अपने मोबाइल की साफ सफाई का विशेष ध्यान रखें।

मोबाइल स्क्रीन के टेक्स्ट को सही आकार में रखें (Cell phone radiation protection – Set the right text size)

आँखों की अच्छी सेहत के लिए आप अपने मोबाइल की स्क्रीन से टेक्स्ट के आकारों में भी परिवर्तन कर सकते हैं। सेटिंग्स पर जाकर टेक्स्ट साइज़ को आँखों के अनुकूल रखें। मोबाइल स्क्रीन से निकलने वाली नुकसानदायक किरणों से आँखों को बचाने के उपाय बहुत सरल हैं, आप अपनी दिनचर्या में थोड़े से परिवर्तन कर आँखों को इन खतरों से बचा सकते हैं। ये सभी उपाय बड़े ही प्रभावी ढंग से कार्य करते हैं और आपकी आँखों की सुरक्षा में आपकी मदद भी करते हैं। शुरुआत के समय यह सभी उपाय आपको थोड़े असहज लग सकते हैं पर इनके रोज प्रयोग से ये जल्दी ही आपकी आदत में शामिल हो जाते हैं। अगर आप मोबाइल के उपयोग की समय सीमा में कटौती नहीं कर सकते तो आपको इन उपायों का पालन आवश्यक रूप से करना चाहिए। ये छोटे छोटे परिवर्तन आँखों की सेहत और सुरक्षा के लिए बहुत ज़रूरी है। ये सामान्य और छोटे छोटे उपाय बड़ी परेशानियों को दूर रखने में आपकी मदद कर सकते हैं। आज मोबाइल हर इंसान की एक ज़रूरत का सामान है जो हमारे कई तरह कामों को आसान बनाने में हमारी मदद करता है, मोबाइल की हानिकारक किरणों से बचाव ही सही सुरक्ष या मोबाइल रेडिएशन सेफ़्टी  (mobile radiation safety) है। लेकिन इसका थोड़ी सावधानी से किया गया प्रयोग इससे होने वाले नुकसान को काफी हद तक कम कर सकता है।
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आँख आने से कैसे बचें, कंजक्टीवाइटिस से बचने के आसान घरेलू उपाय

पिंक आई (pink eye) या आँख आना एक संक्रामक रोग है जिसकी वजह से आँखों में सूजन और दर्द रहता है। यह आँख के सफ़ेद हिस्से में विशेष रूप से दिखाई देता है जिसमें आँखों का रंग लाल या गुलाबी हो जाता है। आँख आना एक संक्रमण (infection) के कारण होने वाला रोग है जिसमें वाइरस (virus) के फैलने की वजह से आँखों में यह रोग होता है। यह तेजी से फैलने वाली यह बिमारी वैसे तो कुछ दिनों में बिना इलाज के अपने आप ठीक हो जाती है। लेकिन बैक्टीरिया (bacteria) और वाइरसजनित यह रोग कभी कभी बहुत गंभीर रूप ले लेता है और आँखों को नुकसान पहुंचाता है, इसका समय पर इलाज न होने पर आँखों की रोशनी चली जा सकती है। एलर्जिक कंजक्टीवाइटिस कई कारणों से हो सकते हैं जैसे आँखों में पराग (pollen) चले जाने की वजह से होने वाली एलर्जी जो संक्रमण का कारण बनती है। इसके अलावा धूल या पशुओं के संपर्क में रहने की वजह से उनके शरीर की रूसी (dander) से होने वाला संक्रमण। कई बार यह मौसमी भी होता है जैसे फूलों के पराग कण हवा के माध्यम से उड़ कर आँखों को संक्रमित कर देते हैं।

पिंक आई या आँख आना क्या है? आँख आने का इलाज कैसे करें? (What are pink eye and how you can treat it?)

पिंक आई (pink eye) या आँख आना (aankh aana) एक संक्रमण है जो आँखों को प्रभावित करता है। इसकी वजह से आँखों में लालिमा के साथ सूजन रहती है। कुछ खास उत्पादों या चीजों की वजह से भी यह संक्रमण होता है।

पिंक आई/ कंजक्टीवाइटिस के इलाज के कुछ आसान उपाय (Simple steps to treat your pink eye)

अगर आपको यह रोग है और आप कांटैक्ट लेंस का प्रयोग करते हैं तो इसे निकाल कर चश्मे का प्रयोग करें, जब तक आपका यह इन्फेक्शन ठीक नहीं हो जाता तब तक कांटैक्ट लेंस आँखों में न लगाएँ। आँखों में दर्द और पानी आने की शिकायत को कम करने के लिए ठंडे और गरम सेंक का इस्तेमाल सबसे बेहतर होता है यह उपाय दर्द को कम करने में काफी हद तक मदद करता है। अगर आपको एलर्जिक पिंक आई की समस्या है तो आपको अपनी आँखों में ठंडी सेंक लेनी चाहिए, यह एलर्जी (allergy) के प्रभाव को कम करता है। इसी तरह गर्म सेंक या भाप की सिंकाई भी पिंक आई (pink eye) में दर्द और लालिमा को कम करने में मदद करती है। हमेशा ध्यान रखें की दोनों आँखों में सिंकाई के लिए अलग अलग साफ कपड़े का प्रयोग हो ताकि इन्फेक्शन एक आँख से दूसरी आँख में न फैल सके। हर बार किसी साफ कपड़े या नैपकिन से ही आँखों को पोंछे, अंदर से बाहर की ओर ले जाते हुये आँखों को पोंछना बेहतर होता है। जल्दबाज़ी में कभी भी न भूलें की उपयोग में लाये गए कपड़े या आँखों के लिए इस्तेमाल किए गए नैपकिन को अलग हटा कर रखें, ताकि यह किसी भी तरह से संक्रमण का कारण बन दूसरों को प्रभावित न करें। आँखों को पोंछने के बाद या आँखों को छूने के बाद हाथों को ज़रूर धोएँ, यह इन्फेक्शन को रोकने के लिए बहुत ज़रूरी है।

कंजक्टीवाईटिस के घरेलू उपाय के दौरान पाये जाने वाले लक्षण (Symptoms to be checked during Home Treatments)

कंजक्टीवाईटिस के लक्षणों में आँखों का लाल होना सबसे आम लक्षण है जो इस दौरान देखने को मिलता है। आँख आने पर आँख के सफ़ेद हिस्से में लालिमा के साथ दर्द और जलन भी रहता है। इसके अलावा आँख आने का एक और सामान्य लक्षण आँखों से लगातार पानी का बहना है। इस दौरान आँखों में होने वाले संक्रमण के प्रतिवाद में आँखों से अत्यधिक मात्रा में पानी का रिसाव होता है यह पानी का रिसाव हरे या पीले चिपचिपे पदार्थ के साथ हो सकता है। इसके साथ आँखों की पलकों में सूजन रहती है जो धुंधलेपन का कर्ण भी बन सकती है इसमें आँखों से साफ दिखाई नहीं देता। यह इन्फेक्शन एक आँख से शुरू होता हुआ दोनों आँखों को प्रभावित कर सकता है। आँख आने या पिंक आई के कुछ अन्य लक्षण इस प्रकार हैं।
  • आँखों में लगातार बढ़ता हुआ दर्द और खुजली
  • आँखों से धुंधला दिखाई देना और कमजोर दृष्टि
  • रोग के लक्षणों में लगातार वृद्धि
  • तेज रोशनी या चमकीली चीजों की तरफ देखने में परेशानी
  • संक्रमण के लक्षण
संक्रमणजनित कंजक्टीवाईटिस (viral conjunctivitis) से तुरंत मुक्ति पाना एक बहुत मुश्किल काम है लेकिन घर पर कुछ घरेलू उपाय द्वारा आप कंजक्टीवाईटिस का प्राकृतिक उपचार कर सकते हैं। इस रोग के इलाज में डॉक्टर एंटीहिस्टामिन (antihistamines) और डीकंजेस्टंट (decongestants) युक्त आई ड्रॉप की सलाह देते हैं। पिंक आई के घरेलू इलाज में गर्म और ठंडी सेंक आँखों के दर्द और लालिमा को कम करने में प्रभावकारी होती है।
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Tuesday, January 10, 2017

आँखों की नजदीकी त्वचा से सम्बंधित ब्यूटी टिप्स

आपकी ऑंखों की त्वचा आपकी उम्र को गुप्त नही रहने देती इसलिए ऑंखों के नीचे वाली त्वचा पर पड़े काले घेरे, झुर्रियाँ जो आपकी उम्र बढने के संकेत दे सकते है उन रोगों को फौरन अपनी त्वचा से दूर कर दे।

झुर्रियों को दूर रखे 

आँखों के नीचे की त्वचा पतली और सिलवट युक्त होती है इसलिए रोज रात आंखों के नीचे सामान्य क्रीम का डबल कोट उचित नही होता। आप जिस क्रीम का भी प्रयोग करते है वह ह्यलुरोनिक एसिड,विटामिन और कोलेजन बढ़ाने वाली क्रीम के साथ-साथ मॉइस्चरिस युक्त क्रीम जरुर होनी चाहिए। अगर आपकी सभी आपूर्ति एक ब्यूटी क्रीम नही पूरा कर रही है तो निश्चित ही दो क्रीम उपयोग करने में आपको बिलकुल संकोच नही करना चाहिए।


सुखी आंखों की अपनी तेल ग्रंथियां नही होती है इसलिए आंखों के आसपास की त्वचा शुष्क होने के साथ-साथ त्वचा में जलन और खुजली भी हो जाती है। त्वचा की इन दिक्कतों से बचने के लिए अच्छे क्रीम के साथ-साथ इन मुसीबतों से छुटकारा दिलाने वाले मेडिकल उत्पादों का भी इस्तेमाल करना गलत नही होगा। अच्छे और अपनी त्वचा युक्त मेडिकल उत्पाद जानने के लिए सिर्फ और सिर्फ स्किन डॉक्टर की मदद लें। सूजन और जलन को कम करने के लिए एक अच्छी क्रीम के साथ-साथ गुलाब जल का भी प्रयोग कर सकती है। 




उज्ज्वल ऑंखों और मोटा होंठ पाने की आपकी चाहत में ओमेगा 3 फैटी एसिड, नट्स में अखरोट जैतून और मछली के तेल के अलावा विटामिन युक्त खाद्य पदार्थ, हरी पत्तेदार सब्जियों और फलों का भरपूर सेवन काफी सहायक होते है। शरीर में लोहे और खून की कमी के परिणामस्वरुप आँखों में सुस्ती आ जाती है इसलिए आपको अपने भोजन में सूरजमुखी के बीज नट, हरी बीन्स, साबुत अनाज, पालक और टोफू को शामिल करना अनिवार्य हो जाता है।


आँखों के नीचे की त्वचा की देखभाल कैसे करें : अनामिका के अलावा आंखों के अंदर और बाहर की पलको को सफाई या अन्य समस्या निदान के लिए हमेशा कोमल और साफ़ वस्तुओं का ही प्रयोग में लाये इसके अलावा आँखों को हमेशा साफ़ और नर्म हाथों से ही स्पर्श करें। 


ब्यूटी प्रोडक्ट : आँखों के आसपास की त्वचा काफी संवेदनशील होती है इसलिए आंखों के आसपास सुगंधित प्रोडक्ट का इस्तेमाल हरगिज ना करें।


विटामिन सी : आंखों के आसपास आप विटामिन सी युक्त पदार्थ का प्रयोग कर सकते है क्योकि विटामिन सी एंटीऑक्सीडेंट के कारण बड़े से बड़े दाग को भी हल्का करने में मदद कर सकता है।




बूढी त्वचा से जंग : आप कोजिक एसिड और माइल्ड हायड्रोक्विनोन के अलावा हल्दी का उपयोग बूढी हो रही त्वचा से लड़ने और त्वचा को टाइट बनाए रखने के लिए कर सकते है।


अर्निका और विटामिन : अर्निका युक्त ब्यूटी प्रोडक्ट्स आँखों के नीचे की त्वचा के लिए अधिक लाभदायक होते है इसके अतिरिक्त आप अर्निका और विटामिन का उपयोग आंखों के काले घेरे कम करने के लिए भी कर सकते है।
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आँखों की नजर को अधिक समय तक स्वस्थ रखने वाले गुड फूड्स

वर्तमान समय में अधिकतर युवाओं की सुंदर आँखों पर चश्मे का पहरा लगा देखा जा सकता है। नजर के कमजोर होने के पीछे अपर्याप्त आहार और आंखों पर अत्याधिक तनाव है। आज बच्चों का अधिकतर समय लैपटॉप, टैबलेट या स्मार्टफोन से चिपके ही मिलते है और समाज में शिक्षा करियर की बात करें तो इतनी प्रतिस्पर्धी के कारण माता-पिता उनको आधुनिक तकनीक से जल्द जल्द तैयार कर देना चाहते है जिसकी वजह से तनाव हो जाता है तथा उसका असर आंखों की रोशनी पर पड़ता है। ऐसी स्थिति में तो स्वस्थ आंखों को बनाए रखने के लिए खानपान का रास्ता ही बेहतर रहेगा। प्रकृति के पास मनुष्य को शारीरिक रूप से फिट रखने के लिए पर्याप्त विकल्प है बस जरूरत है उनके सही समय पर उनकी उचित मात्रा की चुनाव करने का। आइयें जानतें है आंखों को स्वस्थ रखने के लिए कौन से आहार का सेवन करना उचित रहेगा।





गाजर : जब भी आँखों की रोशनी को बेहतर करने की बात होती है तो सबसे पहले गाजर खाने का ही सुझाव दिया जाता है। गाजर के नारंगी रंग में बीटा कैरोटीन की उपस्थिति होती है। बीटा कैरोटीन एक प्रकार का विटामिन ए होता है जो शरीर के अन्य भागों में कुशलता पैदा करने के साथ-साथ रेटिना को भी स्वस्थ रखता है।



हरी पत्तेदार सब्जियां : हरी और पत्तेदार सब्जियों पालक, ब्रोकोली, गोभी, मटर,एवोकैडो और पत्तेदार साग में जिएक्सेन्थिन और लूटेन एंटीऑक्सीडेंट होते है जो मांसपेशियों में गिरावट की गति में कमी लाने के साथ-साथ मोतियाबिंद होने से भी रोकता है।



अंडे की जर्दी : एक अंडे की जर्दी में अच्छी तरह से जस्ता जिएक्सेन्थिन और लूटेन होता है जो आँखों की मांसपेशियों के पतन की रफ्तार को काफी धीमा करने में सहयोग देते है।



मछली : ट्यूना, सामन, मैकेरल और ट्राउट जैसी मछलियों में ओमेगा -3 फैटी एसिड प्रचुर मात्रा में मिलता है। फैटी एसिड के बारें में यह साबित हो चुका है की वह आँखों को ड्राई नही होने देते है। इन सभी मछलियों डीएचए भी उचित रूप में मिलता है। आपको बता दे मछली में मौजूद पोषक तत्व आंख की मांसपेशी को बेहतर बनाने के साथ-साथ मोतियाबिंद होने से रोकता है।



ड्राई फ्रूट्स : ड्राई फ्रूट्स में बादाम, पिस्ता और अखरोट विटामिन ई से पैक्ड होते है और आँखों को स्वस्थ बनाए रखने का सबसे बेहतर विकल्प है। इन ड्राई फ्रूट्स में पाया जाने वाला विटामिन ई मोतियाबिंद टालने के सबसे आदर्श खाद्य पदार्थ है।



साबुत अनाज : साबुत अनाज वाले आहार लो ग्लाइसेमिक के सूचकांक है जो आंख की मांसपेशियों के पतन को रोकने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसी तरह जई, भूरे रंग के चावल,पूरी गेहूं पास्ता और रोटी जैसी खाद्य वस्तुओं में मिलने वाले नियासिन और जिंक आंखों को स्वस्थ बनाए रखने में काफी मददगार साबित होते है।



जामुन और खट्टे फल : जामुन, संतरा, नींबू और अंगूर जैसे फल जो विटामिन सी के प्रमुख स्त्रोत होते है वह आँखों के स्वास्थ्य को बनाए रखने में प्रमुख योगदान देते है। इन फलों के नियमित सेवन से मोतियाबिंद की रोकथाम में मदद मिलती है।



उच्च कैरोटीनॉयड खाद्य पदार्थ चूने : खरबूजा, स्ट्रॉबेरी, कद्दू, टमाटर, शिमला मिर्च और मक्का जैसे खाद्य पदार्थो में न केवल कैरोटेनॉयड्स के बेहतरीन स्रोत हैं बल्कि यह विटामिन ए और सी से भरपूर होते हैं जो आँखों के स्वास्थ्य के संरक्षण में बहुत मददगार होते है। आँखों के स्वास्थ्य को लंबे समय तक बनाए रखने के लिए इन खाद्य पदार्थो को अवश्य अपनी थाली में सजाएं।



सूरजमुखी के बीज : सूरजमुखी के बीज जिंक और विटामिन ई के बहुत अच्छा स्रोत हैं। जिंक प्रकाश के हानिकरक प्रभावों से आंखों की रक्षा करने में मदद करता है। इस प्रकार आंखों के स्वास्थ्य को कायम रखने के लिए यह महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। 
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आँखों के लाल होने के कारण व समस्या से बचाव करने वाले उपाय

आँखों का लाल होना अधिकतर लोगो के जीवन में आने वाले आम नेत्र समस्या है लेकिन जीवन में ऐसा बार बार बिना कारण होने पर आपको जल्द से जल्द चिकत्सक की मदद लेनी चाहिए। आँखों के इस रोग के होने के कई कारण होते है जो हम आपको नीचे बता रहे है।


  • संक्रमण

  • एलर्जी

  • आंख की सतह पर बाहरी वस्तुओं का होना

  • आँखों में खुजली या चोट लगना

  • आंख का थकी होना

  • ड्राई आंखें

  • आंखों पर अधिक दवाव होना
  • उपर दिए गए सभी कारण आँखों के लाल होने के प्रमुख कारण है। आज हम आपको आँखों के लाल होने के कारणों के साथ साथ कुछ ऐसे सुझाव दे रहे है जो मरीज को राहत देने के साथ साथ दवाओं के प्रभाव को भी बढ़ा देंगे। नीचे हम कुछ सुझाव दे रहे है जिनका उपयोग कर आप अपनी आंखों की लालिमा पर जल्द काबू पा सकते है।
    • नल का स्वच्छ पानी या फ़िल्टर के पानी का उपयोग आँखों के लिए करें।

    • पानी अधिक ठंडा नही होना चाहिए। 20 डिग्री के आसपास तापमान वाला पानी आंख के लिए आरामदायक होता है।

    • जब आप खुले में बाहर जा रहे है तो शेड्स का प्रयोग करें।

    • अल्ट्रा वायलेट किरणों से बचाने वाले चश्मा का उपयोग आँखों के लिए सबसे उपयुक्त है।

    • जब भी आप बाइक पर सवारी करें तो पूरे चेहरे के साथ साथ आँखों को भी ढक कर रखें।

    • ककड़ी स्लाइस और आइस क्यूब्स का प्रयोग आँखों को राहत देने का काम करते है।

    • आंखों को हवा के सीधे प्रभाव से बचा कर रखे।

    • कई बार रूम फ्रेशनर स्प्रे मच्छर से बचाने वाली क्रीम व धुएं व शैंपू आदि के प्रयोग के दौरान लापरवाही से भी आँखों को नुकसान पहुँचता है और वह लाल हो जाती है।

    • हमेशा घर के रेफ्रिजरेटर में आई ड्रॉप रखें।

    • प्रेसेर्वटिवे फ्री आई ड्रॉप इस्तेमाल एक समझदारी वाला फैसला है।


    उपर दिए गए सभी सुझावों का पालन करने से पहले स्वतंत्र रूप से अपने डॉक्टर की सलाह अच्छी तरह से लें। प्राथमिक रोग पर चर्चा के बाद ही इनमें दिए उपायों का लाभ लें।
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Monday, February 1, 2016

आई हैल्थ बिगाड़ती आदतें

हमारी आँखे तब तक निरंतर काम करती रहती है जब तक हम सोए नहीं जाते है।  इतना काम करने के बाद भी क्या हम अपनी आँखों को उतना महत्त्व देते है जितना हमें देना चाहिए। आइयें जानते है कुछ ऐसी आदतों को जो हमारी आँखों की हैल्थ को बिगाड़ने का काम करती है।  
  • आई लेंस जहाँ आँखों को चश्मे से निजात दिलाती है मगर क्या आप इन्हे रात में सोने से पहले निकाल कर आई सलूशन में डालते है।  यदि नहीं तो आप खुद अपनी आँखों को नुकसान पहुंचा रहें है। 
  • एक्सपायर्ड ऑय लेंस को प्रयोग करना एक ऐसी आदत है जिसकी जानकारी होने के बाद भी हम इसमें सुधार नहीं लाते है। 
  • आँखों में इन्फेक्शन होने पर बिना डॉक्टर से पूछे किसी भी प्रकार के आई ड्राप का प्रयोग भी इसी क्ष्रेणी में आता है। 
  • आई टेस्ट न कराना, हम सब की सबसे बुरी आदत है।  जिसके कारण समय पर आँखों का इलाज नहीं हो पाता है और आँखों का स्वास्थ्य बिगड़ जाता है। 
  • ख़राब या एक्सपायर आई मेकअप का प्रयोग भी आँखों को नुकसान पंहुचा सकता है। 
  • आँखों को बिना रेस्ट दिए दिन रात इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस पर आँखे गड़ाए रहने पर आँखे थक जाती है ऐसे में यदि आप आँखों को आराम नहीं देंगे तो आँखे कमजोर होंगी। 
  • रात में बिना आई मेकअप उतारे सोना भी आँखों के स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव डालती है।
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बारिश में आँखों का रखे विशेष ख्याल

जब भी मानसून का मौसम आता है तो मन खुश हो जाता है, गर्मी से निजात, रिमझिम फुहारों से खुशगवार मौसम, बारिश की छटा ही निराली होती है। लेकिन मानसून के सीजन में आखों की विशेष देखभाल भी जरूरी होती है। तरह तरह के आँखों के संक्रमण इस ही मौसम में पनपते है। बच्चें एवं स्कूल कालेज जाने वाले छात्रों को विशेष ध्यान देना चाहिए क्योंकि उनमें ही संक्रमण अधिक फैलता है।


कन्जकटीवाईटिस ( नेत्रशोथ)
आँखों का सफेदी वाला भाग एवं पलक का अन्दरूनी भाग कन्जकटीवा कहलाता है। आंख के इस भाग में जलन, लाली और सूजन होने को कन्जकटीवाईटिस या नेत्रशोथ कहते है । इसके मुख्य कारण है इन्फेक्शन और एलर्जी, इस मौसम में आने वाले वायरल बुखार जो शरीर की प्रतिरोघक क्षमता को कम कर देते है उसकी वजह से भी नेत्रशोथ हो जाता है। इस मौसम में सबसे ज्यादा फैलने वाली आम बीमारी यही है। कन्जकटीवाईटिस का संक्रमण बहुत तेजी से फैलता है। आँखों को सबसे अधिक कन्जकटीवाईटिस से ही बचाने की जरूरत होती है। 

स्टाई (अंजनयारी या गुहेरी) स्टाई पलको के आसपास लाली लिए हुए आई सूजन को कहते है। इसमें पस (मवाद ) बन जाता है और पस के पूरी तरह साफ होने पर ही ठीक होती है। इसके होने का मुख्य कारण बिना धूले हाथों से आँखों को रगड़ना एंव बेक्टिरिया है। ये बिमारी भी इस मौसम में आम है।

ड्राईनेस ऑफ़ आई (शुष्क आखें)
आखों में ड्राइनेस आना इस मौसम में आम बात है आँखों में जलन चुभन और पानी आना इसके मुख्य लक्ष्ण है। 

स्वीमिंग पूल इन्फेक्शन इस मौसम में स्वीमिंग पूल में तैरने से भी बहुत इंफेक्शन फैलता है 

इनमें से किसी भी तरह की समस्या होने पर तुरन्त नेत्र विशेषज्ञ से समर्पक करे। एवं इलाज शुरू करवाये। नेत्र विशेषज्ञ की सलाहों का अनुपालन करें। स्वयं डाक्टर बनने का प्रयास न करे एवं बिना डाक्टरी सलाह के कोई दवाई या ड्राप का प्रयोग कतई ना करे। ये आपकी आँखों के लिये घातक हो सकता है। 

इस मौसम में आप कुछ बातों का ध्यान रख के नेत्र समस्याओं से बच सकते है।- साफ सफाई का ध्यान रखे। 
- बिना धुले हाथों से आखों को ना छूएं।
- अपना तौलिया रूमाल एवं साबुन आदि किसी के साथ शेयर न करें।
- धुआं धूल प्रदूषण तथा तेज घूप एवं रोशनी से आँखों को बचा कर रखें।
- घर से बाहर निकलने पर अच्छे सनग्लासेज का प्रयोग करे।
- कन्जकटीवाईटिस या नेत्रशोथ के संक्रमण के समय भीड़भाड़ वाली जगह पर ना जाए। 
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Eyebrow bleaching tips in Hindi – आइब्रो (बिरोनी) ब्लीचिंग

केमिकल द्वारा बालों को रंगने की विधि ब्लीचिंग कहलाती है जिसमे बाल गहरे और खूबसूरत नज़र आने लगते हैं । कई लोगों के बाल तो कई रंगों के होते हैं लेकिन इनकी बरोनिया काली ही रहती हैं जो कि थोड़ा भद्दा लगने लगता है । लेकिन कास्मेटिक उद्योग ने इसका हल निकाला है जिसमे केमिकल द्वारा बरोनिया  के रंग को बदल दिया जाता है । आप ब्यूटी पार्लरों में जाकर अपनी बिरोनियो को अपने हिसाब से रंग करवा सकती हैं लेकिन यह एक खर्चे का सौदा होगा । अब यही ब्लीचिंग सामग्री दुकानों पर उपलब्ध है जहाँ से खरीदकर आप घर पे ही अपनी बरोनिया  को रंग सकती हैं और पारलर में होने वाले खर्चे से छुटकारा पा सकती हैं।

ब्लीच से दिखें जवां

आधुनिक दौर में 35 से 40 वर्ष की महिलाएं उन तरीको को अपना रही हैं जो उन्हें जवां दिखने में मदद करें । बरोनिया  की ब्लीचिंग भी उन्ही तरीकों में से एक है जो आपकी उम्र को 2 से 3 साल तक कम दिखाने में मदद करती है । आज के दौर में न सिर्फ महिलायें बल्कि पुरुष भी जवान दिखने के लिए ब्लीचिंग को अपना रहे हैं । कॉस्मेटिक्स के अलावा घरेलू सामग्री भी ब्लीचिंग के लिए अपनाई जा सकती है, जैसे कि नीबू ब्लीचिंग के लिए एक प्राकृतिक विकल्प होता है ।

बरोनिया  की ब्लीचिंग की विधि

अगर आप घर पर ही अपनी बरोनिया  को ब्लीच करना चाहती हैं तो निम्न चरणों को अपनाएं । सबसे पहले ज़रूरी उपकरण और सामग्री एकत्र करें ।

सामग्री

स्पूली, अच्छे ब्रांड का फेसिअल ब्लीच, वेसलीन और लाइट शैम्पू यह हेयर टोनर ।

ब्लीचिंग के स्टेप्स

स्टेप 1

पानी और शैम्पू से सबसे पहले अपनी बरोनिया  को साफ़ करें

स्टेप 2

धोने के बाद इन्हें हलके कपड़े से पोंछ कर पंखे के नीचे सुखा लें ।

स्टेप 3

अब बरोनिया  पर वैसलीन लगायें यह स्किन पर होने वाले किसी भी तरह के केमिकल रिएक्शन को रोकता है ।

स्टेप 4

अब पैकेट में बताये गये निर्देशों को अपनाकर ब्लीच को बर्तन में मिक्स करें और ब्रश और स्पूली की सहायता से बालों में अच्छी तरह से लगायें ।

स्टेप 5

अब अपनी बरोनिया  की मोटी परत चढ़ाएं ।

स्टेप 6

अब अगर आप हल्का रंग चाहते हैं तो 5 मिनिट और अगर गहरा चाहते हैं तो 10 मिनिट इंतज़ार करें ।

स्टेप 7

इच्छित समय के बाद ब्लीच को किसी कपड़े या स्पूली के माध्यम से निकालें और माइल्ड शैम्पू से धो लें, आप पायेंगे शानदार रंग ।

ब्लीचिंग के फायदे और नुकसान

आईब्रो ब्लीचिंग के फ़ायदे

  • यह आपको आकर्षक बनाता है ।
  • सस्ता होता है ।
  • लगाना बहुत आसान है ।
  • चेहरे की सुन्दरता को निखारता है ।
  • आप जवां नज़र आने लगती हैं ।

आईब्रो ब्लीचिंग के नुकसान

  • इसमें हानिकारक केमिकल होते हैं ।
  • कुछ लोगों में इससे इलर्जी भी देखी जाती है ।
  • इसके बाद बालों में चिकनाहट नहीं रहती ।
  • यह सभी स्किन टोन्स और हेयर टोन्स के लिए उपयोगी नहीं है ।
  • ब्लीचिंग के कुछ दिन बाद जब बाद बढ़ते हैं तो अन्दर के बालों का प्राकृतिक रंग नज़र आने लगता है जिससे आप भद्दे दिखने लगते हैं ।
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