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Monday, January 18, 2016

प्रारंभिक लक्षण जिससे पता चलता है आप गर्भवती है

क्या आप गर्भवती है ? इस बात का संकेत आपको पीरियड के एक या दो सप्ताह लेट होने के बाद ही चलता है लेकिन अगर आप मासिक धर्म चक्र का ट्रैक रखना भूल गयी या फिर आप इसका ट्रैक ही नही रख रही है तो सिर्फ पीरियड की अवधि की उम्मीद में गर्भावस्था के लक्षण का पता नही लगा सकती है।


यकीनन घर पर प्रेगनेंसी किट गर्भावस्था परीक्षण के लिए पक्का सबूत है पर महिलाओं से मिलें अनुभवों के अनुसार नीचे दिए कुछ लक्षणों को शेयर किया गया है जिनकी मदद से मासिक धर्म की ट्रैक भूल के बिना भी घर पर पता लगाने में आसानी होगी कि आप गर्भवती हो सकती है या नहीं।




स्तनों में सूजन : स्तनों में वृद्धि गर्भावस्था के प्रारंभिक लक्षणों में से है और ऐसा हार्मोन के स्तर में वृद्धि की वजह से होता है। बॉडी के इस संवेदनशील भाग के वृद्धि का अहसास जल्द महसूस होने लगता है।

थकान : हार्मोन प्रोजेस्टेरोन की तेजी से बढ़ते स्तर की वजह से आपको अचानक थकान पहले की अपेक्षा जल्दी महसूस होने लगती है। जल्दी थकान प्रेगनेंसी के लक्षण नही है लेकिन गर्भावस्था होने पर हार्मोन की वजह से जल्दी थकान आती है।




मतली या उल्टी : घरों में या आज भी गांवों में ज्यादातर प्रेगेंट महिलाओं की पहचान इसी तरकीब के द्वारा की जाती है। ज्यादातर गर्भाधान करने वाली महिलाओं को सुबह के समय मिचली या उलटी की शिकायत होती है लेकिन गर्भावस्था से संबंधित मतली और उल्टी की समस्या सुबह, दोपहर या रात को भी हो सकती है।




भोजन की रुचि में परिवर्तन: आप नव गर्भवती होती है तो आपकी पसंदीदा सैंडविच कॉफी अन्य सादे खाने में आपकी अरूचि झलकने लगती है। ऐसा तेजी से सिस्टम में एस्ट्रोजन की मात्रा में वृद्धि का प्रभाव से होता है। प्रेगनेंसी आने के बाद महिलाओं का जी चटपटे भोजन की तरफ बढने लगता है अचानक खाद्य पदार्थों में आया बदलाव भी गर्भवती होने की निशानी होता है।




पेट में सूजन : गर्भावस्था में थोड़ी अवधि के बाद ही हार्मोनल परिवर्तन की वजह से पेट फूलना शुरू होने लगता है और इसी कारण पाचन क्रिया भी बिगड़ने लगती है। गर्भावस्था में कब्ज और पेट ऐंठन महसूस की शिकायत होना आम बात है। अगर आपके पीरियड लेट है और आपके कपड़ो की फिटिंग खराब हो रही है तो यह प्रेगनेंसी के लक्ष्ण है।




पेशाब का बार-बार आना : गर्भवती बनने के फौरन बाद बाथरूम के लिए जल्दी-जल्दी जाना पड़ता है। ऐसा इसलिए होता है क्योकि गर्भावस्था के दौरान बॉडी में अतिरिक्त तरल पदार्थ निकलता है जिससे मूत्राशय पर प्रेशर बढ़ता है और बार-2 पेशाब के लिए जाना पड़ता है।




शरीर का तापमान उच्च हो जाना : गर्भवती होने के बाद बॉडी का तापमान सामान्य से थोडा अधिक बढ़ जात है अगर यह 18 दिनों तक कायम रहता है तो यह गर्भावस्थात के प्रारंभिक लक्षण है।




बॉडी में दर्द : प्रेग्नेंिट होने पर हार्मोन में परिर्वतन होना स्वाभाविक क्रिया है और इसी क्रिया के कारण सिरदर्द और पीठदर्द की समस्या उत्पन्न हो जाती है। गर्भावस्था में मन भी चंचल हो जाता है और एक काम में मन नही लगता है।




उपर दिए गयें उपायों की मदद से आप गर्भावस्था के प्रारंभिक लक्षण तो जान सकती है पर गर्भावस्था को पुख्ता करने के लिए घर पर एक प्रेगनेंसी टेस्ट कर लें यह बहुत ही आसान होता है। पेशाब की बूंदों को प्रेगनेंसी किट के अंदर डाल कर पॉजिटिव या निगेटिव परिणाम की परीक्षा करें। घरेलू प्रेगनेंसी किट से कुछ क्षणों में ही पक्का पता चल जायेगा कि आप गर्भवती है या नही।
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गर्भवती महिलाएं भोजन में इन आहारों से रखें परहेज



अगर आप गर्भवती है और किसी बच्चे को नया जीवन देने वाली है तो आपको अपनी लाइफस्टाइल के साथ अपनी फूड् लिस्ट का भी खास ध्यान रखना चाहिए क्योकि अगर आप खाने पीने में लापरवाही करती है तो आप बीमार हो सकती है जिसका नुकसान गर्भ में पल रहे बच्चे को भी उठाना पड़ सकता है। आप जो भी भोजन ग्रहण करें वह ताजा और पूरी तरह पकाया हुआ हो इसके अलावा आपको अतिरिक्त ध्यान के लिए उन खाद्य पदार्थ को भी सुनिश्चित करना होगा जिसका सेवन आप गर्भावस्था के दौरान नही करना चाहिए या कम करना चाहिए।




कैफीन : गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को अधिकतर घर में रहना पड़ता है जिसकी वजह से सुस्ती और कामकाजी महिलाओं को घर में बोरियत का अहसास होता है और ऐसे में कॉफी, चाय, कोला या ऊर्जा वाली बजारी पेय अपनी डाइट में सामान्य से अधिक बढ़ा देती है जिससे गर्भपात का खतरा और अन्य स्वास्थ्य नुक्सान का सामना करना पड़ सकता है इसके अलावा गर्भ के पहली तिमाही के दौरान कैफीन का अधिक सेवन हरगिज नही करना चाहिए।




सॉफ्ट पनीर : कई बार गर्भवती महिलाओं की प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर हो जाती है और ऐसे में खाद्य जनित बीमारियों से ग्रस्त होना काफी आसान हो जाता है इसलिए सॉफ्ट पनीर का सेवन से परहेज करना चाहिए और अगर खाना पड़ भी जाए तो इसे अच्छी तरह पका कर ही खाना चाहिए। सॉफ्ट पनीर के अलावा नीले पनीर और बजारी पुराने पनीर में कई हानिकारक बैक्टीरियां उत्पन्न हो जाते है इसलिए सफेद छिलके के साथ पनीर अर्थात सॉफ्ट पनीर का प्रयोग पूर्ण सावधानी से करना चाहिये और एतिहत के तौर पर अगर पहले तिमाही इसका सेवन ना किया जाए तो ज्यादा अच्छा है।




मांस मछली अंडे : मांस मछली अंडे से बेशक प्रोटीन और विटामिन के महत्वपूर्ण हो और इन भोज्य पदार्थो को बेशक अनगिनत फायदे हो लेकिन गर्भवती होने पर इनकी कटौती करना ही बेहतर है। मछली का सेवन गर्भ में पल रहे बच्चे के दिमाग में बाधा पैदा कर सकता है क्योकि कुछ मछलियों में मरक्युरी होती है इसके अलावा अंडे सलमोनेल्ला बैकटीरिया से ग्रस्त होते है जो शरीर में कई बिमारियों का कारण बनते है। मांस वैसे भी अधिक गर्म भोजन होता है और पहले तिमाही पर इसका सेवन करने से गर्भपात का खतरा बढ़ जाता है। इसके अलावा अगर आप मार्किट में बने मांस या मछली का प्रयोग करती है तो संक्रमण और स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा अधिक बढ़ जाता है।




शराब और सिगरेट छोड़ दे : शराब और सिगरेट का सेवन हर लिहाज से बुरा है लेकिन आज की भागदौड लाइफ में यह महिलाओं की लाइफस्टाइल में शामिल है लेकिन गर्भावस्था में इनका अधिक प्रयोग भ्रूण में पल रहे बच्चे को मानसिक तौर पर विकलांग,शारीरिक असामान्यताएं और उसके विकास तंत्र को प्रभावित कर सकता है।


जो महिलाएं गर्भवत के समय में शराब और सिगरेट पीती है उनके व्यवहार समस्याओं में भी असमानता आ जाती है इसलिए कुछ देशों में गर्भवती महिला के शराब और सिगरेट पर प्रतिबंध लगायें गये है।





अपने थाली से गायब करें इन खाद्य पदार्थों को : जो महिलाएं प्रेगनेंसी के दौरान मिसकैरेज का सामना कर चुकी है महिलाओं को अपने खाने की थाली से बैंगन, मिर्ची, प्याज, लहसुन, हिंग, बाजरा, गुड़ जैसे खाद्य पदार्थो को गायब कर देना चाहिए या बहुत ही कम प्रयोग में लाना चाहिए।


इन खाद्य पदार्थो के अलावा फलों में पपीते ,अंगूर,अनानस जैसे फलों का सेवन बड़ी सावधानी से करना चाहिए क्योकि इन फलों के कच्चे होने पर हानि पंहुचा सकते थे।


प्रेगनेंसी में खान-पान का ध्यान रखते हुए मसालेदार भोजन और मैदे से बने भोजन से परहेज ही गर्भावस्था स्वास्थ्य के लिए बेहतर है।


प्रेगनेंसी के समय जो भी खाएं वह साफ़ सुधरा और पूर्ण रूप से पका हुआ हो, भोजन में जायफल और अधिक शक्कर की मात्रा वाले भोजन को भी अपनी दिनचर्या डाइट में सुझबुझ के साथ ही करें।
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Sunday, January 17, 2016

मिसकैरेज अर्थात गर्भपात होने के प्रमुख कारणों की लिस्ट

नवजात शिशु को जीवन में लाने की योजना पर उस वक़्त पानी फिर जाता है जब गर्भवती महिला का गर्भपात अर्थात मिसकैरेज हो जाता है। प्रेगैंसी की अधिक ख्वाइश के बाद अगर मिसकैरेज होता है तो गर्भपात अवसाद महिला के अंदर क्रोध, भय,अपराध विनाशकारी भावनात्मक नतीजों को जन्म देने के साथ-साथ उनको मानसिक रूप से भी प्रताड़ित करता है।



गर्भावस्था के नुकसान के कठिन पहलुओं से लगभग सभी अवगत है लेकिन पूर्ण जानकारी लेकर माता-पिता के मिसकैरेज दर्द को कम किया जा सकता है। आइयें जानते है आनुवंशिक वजह ना होने पर वो कौन-कौन से कारण है जिनकी वजह से गर्भपात या मिसकैरेज हो जाता है।



प्रमुख शारीरिक कमियां और बीमारियाँ जिनकी वजह से होता है मिसकैरेज।




महिला का स्वास्थ्य : गर्भवती होने से स्वस्थ बच्चे को जन्म देने तक की प्रक्रिया में महिला का स्वस्थ्य अहम भूमिका अदा करता है इसलिए गर्भवती महिला शारीरिक रूप से एवं मानसिक रूप से स्वस्थ होना बहुत जरूरी है। कोई बड़ी बीमारी जैसे हार्ट की या ब्लड प्रेशर,शुगर,किडनी की तकलीफ या फिर यूट्रस से संबंधित रोग होने पर मिसकैरेज अर्थात गर्भपात का खतरा बढ़ जाता है।






क्रोमोजोम असामान्यता : क्रोमोजोम अर्थात गुणसूत्र असामान्यता भी मिसकैरेज की अहम वजहों में है। हाथ नीचे, एक गर्भपात में अंडे या भ्रूण गठन के दौरान शुक्राणु के गुणसूत्रों के साथ समस्या सबसे गर्भपात होने के सबसे आम कारणों में है। गुणसूत्रों अगर डीएनए के ब्लॉक कर रहे है तो बच्चे के रंग आंखों के विकसित होने में काफी दिक्कत आती है। सामान्य रूप से विकसित ना होने या भ्रूण के सक्षम ना के होने के परिणामस्वरूप मिसकैरेज हो जाता है।


एक अनुमान के अनुसार प्रेगनेंसी की शुरुआती अवस्था मिसकैरेज वाले दो-तिहाई जोड़ो में गुणसूत्र असामान्यताओं की संभावना को माना गया है।




नाल में दिक्कत : बच्चे के लिए रक्त की आपूर्ति को मां से करने वाले अंग का नाम नाल है अगर नाल के विकास में समस्या होती है तो भी गर्भपात होने का खतरा बना रहता है।



खून में कमी : जिन महिलाओं में शरीर में खून की कमी होती है उनका भी मिसकैरेज गर्भवस्था की शुरूआती अवस्था में हो जाता है क्योकि खून की कमी की वजह से फ़ीटस का पूर्ण विकास संभव नही है।





कमजोर गर्भाशय ग्रीवा : कुछ मामलों में गर्भाशय ग्रीवा की मांसपेशियों को सामान्य की तुलना कमजोर पाया जाता है जिस वजह से गर्भ पूर्ण रूप से नही ठहर पाटा है और मिसकैरेज हो जा है। समाज में कमजोर गर्भाशय ग्रीवा को अक्षमता के रूप में जाना जाता है।


थायराइड विकार : थायराइड बहुत कम या बहुत अधिक हो दोनों ही रूप में यह बांझपन की समस्याओं को जन्म देता है या फिर मिसकैरेज का कारण बन सकता है। अगर थायराइड कम होगा तो हार्मोन उत्पादन की भरपाई करने की कोशिश करेंगे जिससे ओवुलेशन को दबा सकते हैं इसके विपरीत थायराइड अधिक होगा तो बहुत सारे हार्मोन का उत्पादन करेंगा गर्भाशय बनाने पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकते और वह एस्ट्रोजन की क्षमता के साथ हस्तक्षेप कर गर्भाशय से खून बहाने का नेतृत्व कर सकते हैं जिससे गर्भपात का खतरा बन जाता है।




मधुमेह : अनियंत्रित मधुमेह ज्यादातर गर्भपात का कारण बनता है। जो महिलायें प्रेगेनेंट हो उन्हें रक्त में A1C शर्करा को नियंत्रित करने के साथ-साथ रक्त शर्करा रक्त परीक्षण की जाँच भी समय-समय पर कराते रहना चाहिए।




डेंगू : ताजा रिपोर्ट के अनुसार नवजात शिशुओं को गर्भ में पाल रही उन महिलाओं के मिसकैरेज में वृद्धि हुई है जो डेंगू से पीड़ित होती है। डेंगू प्लेटलेट स्तर में गिरावट का कारण बनता है इसलिए गर्भवती महिलाओं में भारी रक्तस्राव का खतरा बढ़ जाता है। गर्भ के पहले दो हफ्तों के दौरान बीमारी विकसित होती है तो गर्भपात का खतरा सबसे अधिक हो जाता है इसलिए गर्भवती महिला के डेंगू होने पर जल्द से जल्द अच्छे डॉक्टर से परामर्श करना चाहिए।


उपरोक्त बीमारियाँ को अतिरिक्त कुछ अन्य बीमारियाँ नीचे दी गयी है जो गर्भपात की वजह बनती है।


  • गुर्दे की बीमारी


  • कोएलियाक बीमारी


  • बैक्टीरियल दिक्कत


  • क्लैमाइडिया


  • एचआईवी


  • गानरीअ


  • सिफलिस


  • मलेरिया


  • खसरा


लाइफस्टाइल : आप की पर्सनल लाइफ स्टाइल जैसी मर्जी हो लेकिन जब आप गर्भावस्था में होती है तो आपका लाइफस्टाइल प्रेगनेंसी के अनुकूल नही होता है तो मिसकैरेज होना स्वाभविक हो जाता है। आइये जानतें है आपकी उन आदतों को जो गर्भपात का खतरा बढ़ाती है।




सिगरेट या हुक्का मारने की आदत : प्रेगनेंसी के दौरान सिगरेट की आदत छोड़ देनी चाहिए नही तो इस लत की वजह से मिसकैरेज हो सकता है क्योकि जब महिलायें गर्भवती होने पर सिगरेट या हुक्के के कश का सेवन करती है तो सिगरेट का धुंआ वह उनके गर्भ में आक्सीजन की कमी कर देता है जिसकी वजह से फ़ीटस तक पर्याप्त मात्रा तक में आक्सीजन नही पहुच पाती और प्रेगेन्ट महिला का गर्भपात हो जाता है। इसके अलावा क्रोमोजोम असामान्यता भी सिगरेट सेवन की वजह से आती है।





गर्भावस्था में कैफीन का अधिक उपयोग : हमारे शरीर को कैफीन,शराब,कॉफ़ी,चाय आदि से सामान्य रूप में मिलती है इसलिए शराब आदि को तो त्याग देना चाहिए तथा कॉफ़ी चाय की मात्रा डॉक्टरी सलाह पर ही लेनी चाहिए। साधारण रूप से एक दिन में 200 मिलीग्राम से अधिक कैफीन का उपयोग की वजह से भी कई बार मिसकैरेज हो जाता है इसलिए डॉक्टरी सलाह के बाद ही कैफीन की मात्रा को अपने लिए चुनना चाहिए। कैफीन के अधिक उपयोग से गर्भनाल के निकलने का जोखिम बढ़ जाता है जो गर्भपात के प्रमुख कारणों में है।




तनाव पूर्ण लाइफस्टाइल : अगर आपकी लाइफस्टाइल तनाव पूर्ण और चिंता से ग्रस्त रहती है तो गर्भावस्था के दौरान गर्भपात का खतरा बना रहता है। शारीरिक स्वस्थता के साथ-साथ बच्चे के सम्पूर्ण विकास के लिए मानसिक रूप से मजबूत और खुश होना अनिवार्य है।




सही भोजन की परख ना होना : प्रेग्नेंट महिला की डाइट प्लान सामान्य से बिलकुल भिन्न होता है इसलिए एक प्रेग्नेंट महिला को पता होना चाहिए कि उसके हेल्थ के अनुसार उनके लिए कौन से भोजन उपयुक्त है और कौन सा अनउपयुक्त है। अधिक गर्म प्रवृति वाले भोजन फ़ास्ट फ़ूड , मसालेदार,अधपका मीट मछली और संक्रमण युक्त भोजन अधिकतर मिसकैरेज का कारण बनते है इसलिए गर्भावस्था के शुरूआती अवस्था में भोजन का चुनाव बड़ी समझदारी से करना चाहिए।




गलत दवाइयों का चुनाव : कई बार महिलाएं प्रेगनेंसी के दौरान हल्के बदन दर्द या बुखार अवस्था में बिना डॉक्टरी सलाह के दवाईयां ले लेती है जो उनकी गर्भावस्था बॉडी के अनुकूल नही होती है तो भी गर्भपात हो जाता है इसके अलावा सामान्य बिमारी में डॉक्टर से प्रेगनेंसी की बात छुपाने का कारण भी मिसकैरेज की वजह बनती है।


कुछ अन्य कारण जिनकी वजह से हो सकता है मिसकैरेज


  • प्रेग्नेंट महिला को किसी तरह का सदमा लगना


  • प्रेगनेंसी के समय गलत सेक्स पोजीसन का चुनाव


  • प्रेगनेंसी के समय फिटनेस की चाह में गलत कसरत का चुनना


  • उछल कूद से सीढियाँ चढना या रोजाना अधिक देर तक ड्राइव करना


  • अधिक समय तक बैठे रहना या फिर खड़े होकर काम करना


  • अधिक हवाई यात्रा करना
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बच्चे के जन्म से जुड़े मिथकों का भंडाफोड़

जब भी कोई महिला गर्भवती होती है उसे लोगो से अनगिनत सलाह सभी दिशाओं से मिलने लगती है। समस्या अच्छी सलाह मिलने से नही है बल्की उन सलाहों से है जो कभी भी वैज्ञानिक तथ्यों पर कभी भी खरी नही उतरती बस उन सलाहों का संचार एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में बिना तर्क के आधार किया जाता रहा है और अधिकतर महिलाये अपने होने वाले बच्चे के भलाई की खातिर उन सलाहों को बिना सोचे समझे मनाने लगती है। आज हम उन्ही मिलने वाली सलाहों में से कुछ मिथकों का भंडाफोड़ करने जा रहे है जिसे आम लोग आज भी बिना किसी तर्क के अपनाते है। 





1 मिथक: दीवार पर सुन्दर बच्चे का फोटो लगाने से बच्चा सुन्दर होगा। 

सच्चाई: किसी भी जन्म लेने वाले बच्चे की शरीरिक सरंचना उसके आनुवंशिक-तत्व पर निर्भर करती है बच्चे की शरीरिक बनावट दीवार पर लटकी कोई तस्वीर कभी भी निश्चित नही कर सकती है। हालांकि गर्भावस्था के दौरान दीवार पर फोटो लटकाना फिर भी होने वाले बच्चे के लिए एक भलाई का ही काम है क्योकि इन चित्रों की वजह से ही एक गर्भवती महिला में सकारात्मक उर्जा का प्रवाह होता है और महिला तनाव से दूर रहती है। जो बच्चे की वृद्धि और विकास में बाधा बनता है अगर आप हमेशा सकारात्मक रहती है तो बिना दीवार पर तस्वीर लगाये आप एक स्वस्थ और प्यारे बच्चे को जन्म दे सकती है।

2 मिथक:सातवें महीने में नारियल पानी पीने से बच्चे के सिर बड़ा होता है
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सच्चाई : नारियल पोटेशियम का एक अच्छा स्रोत है और शरीर के अनुकूल इसका सेवन पेट और स्वास्थ्य के लिए काफी अच्छा होता है पर इससे बच्चे के सिर के आकार पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। गर्भावस्था के दौरान नारियल पानी पीने के कई कारण हो सकते है पर बच्चे के सिर बड़ा हो कतई नही। 

3. मिथक: नारियल पानी के के कारण ही बच्चे के बाल अधिक होते है


सच्चाई : कई लोग मानते है की नारियल पानी पीने के कारण ही बच्चे के बाल अधिक होते है और महिला के पेट में गैस बनती है नारियल पानी का ये तथ्य भी पहले के तरह गलत है इसमे कोई सच्चाई नही है आम तौर पर तीसरे महीने में बच्चे का सिर निचे होता है और पेट बढ़ने के परिणामस्वरूप गैस बनती है। 

4. मिथक: सबसे पहले सफेद रंग का भोजन करने से बच्चे का रंग गोरा होता है। 

सच्चाई : बच्चे को गोरा रंग देने की चाहत में कई घरो में दुल्हन का सुबह के खाने को दूध रोटी या अन्य किसी सफेद भोजन से बदल दिया जाता है यह सरासर मिथक है इसमे कोई सच्चाई नही है क्योकि नवजात शिशु के रंग पर खाना खाने का कोई असर नही होता ये सब आनुवंशिकी तत्वों पर निर्भर करता है। गर्भावस्था के दौरान दूध अंडा ब्रॉकली पालक पनीर टोफू फल मीत मछली और अन्य कई पौष्टिक आहार लेने चाहिए
 
5. मिथक: ग्रहण के दौरान किसी भी गतिविधि में लिप्त होने से बच्चे में दोष पैदा हो जायेगा।: 

सच्चाई : ग्रहण लगना एक प्राकृतिक घटना है।इससे बच्चे में कोई दोष नही पैदा होता और न ही वो बेढंगा होता है। इसका ये बिल्कुल मतलब नही है कि आप नग्न आंखों से ग्रहण देख सकती है। गर्भवती महिलाओं को ग्रहण में जनरल सावधानियों के कदम उठाए जाने की जरूरत होती है। 





6. मिथक: पेट के आकार बच्चे के लिंग पता किया जा सकता है।

सच्चाई : गर्भधारण के बाद सबसे अधिक चर्चित विषय होता है लड़का होगा या लड़की . कई लोग पेट के आकार देखकर लिंग का अनुमान लगाते है बिना टेस्ट के ये कतई पता नही लग सकता लड़का है या लड़की। कई लोग लड़की की चाल देखकर लिंग तय करने का दावा करते है। कोई पेट में बच्चे के लात मरने की गिनती करके तो कोई फेस रीडिंग करके और कई लोग महीने गिनती करके बच्चे के लिंग की भविष्यवाणी करने की कोशिश करते है। 

7. मिथक: घी या तेल खाने से बच्चे को प्रसव के दौरान आसानी होगी। 

सच्चाई : घी या तेल बच्चे को किसी भी तरह बाहर फिसलने में मदद नहीं करता है।ये पदार्थ सिर्फ आपके शरीर में कैलोरी प्रदान करते है जो बच्चे के जन्म के समय काम आती है। कभी भी अधिक वसायुक्त भोजन करने से बचना चहिये। गर्भावस्था के समय सिर्फ और सिर्फ संतुलित आहार को ही प्रथिमिकता देनी चाहिए। 

8. मिथक: दो लोगों के लिए खा रहे है।: 

सच्चाई : यह काफी आम धारणा है कि आप दो लोगों के लिए खा रहे हैं लेकिन ये गलत है। आप भोजन की मात्रा दोगुनी नही कर सकते। कई गर्भवती लेडी को खाद्य समूहों में सिर्फ पोषण वसा की मात्रा अधिक दी जाती है जबकि उसकी जरूरत नही होती। गर्भवती महिलाओं की गर्भावस्था अलग अलग होती है इसलिए बिना डाक्टर की सलाह लिए आप ऐसा कुछ न करे। डॉक्टर की सलाह से आप भोजन में बेहतर विकल्प चुन सकती है। 
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गर्भावस्था में किये व्यायाम का लाभ बेबी बॉयज को अधिक प्राप्त होता है

व्यायाम एक शरीर को स्वस्थ रखने के लिये सबसे उत्तम,कम खर्चीला और सबसे आसान तरीका है। बढ़ती और भागदौड भरी लाइफ में पुरुष और महिलाओं दोनों में व्यायाम की महत्ता बढ़ी है। आमतौर पर रोजाना लाइफ में महिलायें अपनी फिटनेस का ध्यान रखते हुए व्यायाम तो कर लेती है पर गर्भावस्था के दौरान जब शरीर में रक्त संचार की अधिक आवश्यकता होती है तो महिलायें व्यायाम से कन्नी काट जाती है।


एक नये शोध के अनुसार गर्भावस्था के दौरान अच्छे प्रशिक्षक की मदद से किये गये ऑक्सीजन को उचित मात्रा में रखने के अलावा भोजन को सही ढंग से पचा कर सभी पौष्टिक आहारों का लाभ बेबी तक आसानी से पहुचने में मदद करता है।



हाल ही में हुए इस शोध की पूरी बातों पर विश्वास करें तो गर्भावस्था के दौरान किये हुए सभी व्यायामों और योग का लाभ जितना गर्भ में पल रहे लड़के को होता है उतना लाभ लड़कियों को नही मिलता है। अपेक्षा से अधिक वजन वाली औरते अगर गर्भाधारण के समय नियमित व्यायाम और योग करती है तो उन माताओं के बच्चों के अन्दर मधुमेह होने का खतरा कम हो जाता है इसलिए सभी मोटी औरतों को बच्चे के इंसुलिन एवं ग्लूकोज के स्तर को ठीक रखने के लिए गर्भावस्था के दौरान नियमित व्यायाम और योग करना चाहिए।



उपरोक्त लिखी शोध की बातें आस्ट्रेलिया के एक जाने माने विश्वविद्यालय के शोध के दौरान पाई गयी है। शोध करने वाली टीम ने ये शोध चुहिया पर किया है।
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आपको जल्दी प्रेगनेंट करेंगी यह सेक्स पोजीसन

सुखद विवाहित जीवन में प्रेगनेंसी अहम रोल निभाती है और प्रेगनेंसी के लिए सेक्स अतिअनिवार्य है इस बात में बहस का कोई मुद्दा नही है लेकिन बहस तब शुरू हो जाती है जब प्रेगनेंसी के लिए सेक्स पोजीशन के उपयोग की बात की जाती है। अगर यें कहा जाता है प्रेगनेंसी पाने में सेक्स पोजीशन अहम रोल निभा सकती है तो कुछ लोग इस बात को कोरी बकवास कह दरकिनार कर देते है।



यदि आप गर्भवती होने का प्लान कर रही है और गर्भधारण के लिए दोनों पार्टनर के पूर्ण स्वास्थ्य होने के बावजूद सफलता हासिल नही हो रही है तो आप साथी के साथ सेक्स करते समय कुछ सेक्स पोजीशन में बदलाव लाकर जल्द से जल्द कंसीव कर सकती है।


ध्यान देने वाली कुछ जरूरी बातें : जब नियमित रूप से यौन संबंधों में इन पोजीशनो की मदद ली जाती है तो अंडे के प्रति आदमी के शुक्राणुओं की यात्रा को मंजिल तक पहुचने में मदद मिलती है और संभोग के बाद संकुचन से पहले आदमी के शुक्राणु तेजी से अपने गंतव्य तक पहुंच कर महिला के गर्भधारण इच्छा को पूर्ण करते है। इसके अतिरिक्त अगर लवबर्ड्स संभोग के समय फोरप्ले पर अधिक समय व्यक्त करते है तो बिस्तर में दोनों जोड़ी चरम पर पहुच जाती है और इस बेहतरीन सेक्सुअल समय में इन पोजीशनों से प्रेगनेंसी प्राप्त करना ओर आसान हो जाता है। 



मिशनरी सेक्स पोजीशन : इस सेक्स पोजीसन में पुरुष पार्टनर शीर्ष पर होता है महिला पीठ पर लेटी हुई होती है। दोनों जब इस पोजीशन सेक्स कर रहे होते है तो पुरुष आगे की तरफ झुका होता है जो जिस वजह से आदमी गर्भधारण के करीब पहुच जानता है और बोनस स्वरूप शुक्राणु को गर्भाशय तक सही तरीके से प्रवेश प्राप्त करने में छूट मिल जाती है।


मिशनरी सेक्स पोजीशन में होते हुए कूल्हों के नीचे एक तकिया रखकर सेक्स किया जाए तो सेक्स रोमांचक तो होता ही है साथ में गर्भाशय ग्रीवा तक स्पर्म की यात्रा सरल हो जाती है। आपको बता दे कूल्हों के नीचे तकिया वाले विचार का वास्तविक में कोई सबूत नहीं है यह एक मत है।



डॉगी स्टाइल सेक्स पोजीशन : यह सेक्स पोजीसन गर्भाशय ग्रीवा को खोलता है और अधिकांश पुरुषों इस स्टाइल से प्यार करते है इसलिए वह इससे सेक्स क्रिया से सहमत भी आसानी से होंगे। डॉगी स्टाइल में पुरुष महिला के पीछे से अपनी मूवमेंट करता है और शिश्न से निकने वीर्य गर्भाशय के काफी करीब होने के कारण बड़ी सुगमता से अण्डे से मिल जाते है। 



ट्रायंगल सेक्स पोजीशन : इस सेक्स मुद्रा की स्थिति मिशनरी सेक्स पोजीसन से काफी मिलती जुलती है। मिशनरी पोजीशन की तरह आदमी इसमे ऊपर होता है और महिला पार्टनर नीच पीठ के सहारे से पैरों को लपेट कर लेटी होती है और पुरुष साथी का सिर ऊपर की तरफ होता है। इस स्थिति के बारे में सबसे अच्छी बात यह की इसमे कदमों की अधिक आवश्यकता नही पड़ती है। इस बेहतर सेक्स करने और साथी को उत्तेजित करने में आसानी होती है। इस स्थिति में महिला को लिफ्ट कराने के लिए तकिया का उपयोग किया जा सकता है। अगर साधारण रूप से भी इसे बेहतर ढंग से समय लगा कर किया जाए अधिकतर महिला इस सेक्स की चाहत बार-बार करती है और स्थिति में पेनिस बड़ी ही सरलता से गहराई में प्रवेश कर जाता है।



रॉक एंड रोलर सेक्स पोजीशन : इस सेक्स पोजीशन के बारे में सबसे अच्छी बात यह है पुरुष हाथों के जोर से महिला साथी की जी स्पॉट के अंदर तक हिट कर पाते है। गहरे प्रवेश के बाद प्रेगनेंसी काफी हद तक सुनिश्चित हो जाती है। इस पोजीशन के मिशनरी सेक्स पोजीशन की तरह ही आदमी उपर और महिला पार्टनर नीचे होती है बस फर्क इतना है की इस पोजीशन में संभोग करते हुए महिला अपने पैरो को सामान्य से अधिक ऊपर की तरफ उठा लेती है। 



माउंटेन सेक्स पोजीशन : यह सेक्स पोजीशन डॉगी स्टाइल की तरह ही होती है लेकिन इसमे पुरुष पार्टनर महिला पार्टनर की पीठ से चिपका होता है और महिला पैरों को मोड़ कर हाथों की सहयता से कमर को उठा कर रखती है। कमर में मोड़ को बढ़ाने के लिए और आरामदायक सेक्स करने के लिए महिला के आगे तकिए की संख्या को कम ज्यादा कर माउंटेन खड़ा कर सकते है। यह सेक्स मुद्रा सिर्फ स्पाइसी सेक्स के लिए उत्तेजित नही करता है अपितु बच्चा पाने की तमन्ना को काफी हद तक पूर्ण करने की अनुमति देता है।



स्पूनिंग सेक्स पोजीशन : इस सेक्स पोजीशन में पुरुष को महिला पार्टनर को बहुत करीब से पकड़ने में मदद करता है और अन्य आम सेक्स स्थिति की अपेक्षा इस पोजीसन में प्रेगनेंट होने की उम्मीद अधिक बढ़ जाती है। स्पूनिंग सेक्स पोजीशन में आदमी पीछे तैनात होता है जिस कारण जी-स्पॉट पर अच्छे से हिट होता है और 90 डिग्री के कोण पर झुक कर स्पर्म को गर्भाशय ग्रीवा तक पहुँचता है।


इस सेक्स पोजीशन में आसान प्रवेश के लिए ऊपरी घुटने लिफ्ट कर सकते है। इस सेक्स पोजीशन की जो सबसे अच्छी बात है वह यह है कि पुरुष अपनी महिला साथी के पेट,स्तनों,गर्दन और कान को दुलार कर सकते है जो आपकी लिंग और योनि दोनों उत्तेजित कर अंडकोश को भी प्रोत्साहित करता है। 



हल कामसूत्र पोजीशन : कामसूत्र में इस सेक्स पोजीशन की गिनती एक अधिक साहसी पोजीशन के रूप में होती है। इस सेक्स पोजीशन को अपनाने के लिए महिला को बेड को पिछले हिस्से पर आना होगा और पुरुष साथी को बेड के नीचे खड़ा होने पड़ेगा। इस सेक्स स्थिति में महिला के पैर और बॉडी का पिछला हिस्से के साथ वह खुद हवा में होगी और पुरुष उसके पैरों के बीच खड़ा होकर पीछे से कूल्हों को लिफ्ट कराते हुए जांघों के जोर से शुक्राणुओं को प्रवेश कराता है और महिला हाथों और कोहनी की मदद से पुरुष पार्टनर का समर्थन करती है।


यह सेक्स पोजीशन प्रेगनेंसी में मदद के साथ-साथ अच्छी कसरत भी कराता है जिसमे आप दोनों अपनी काफी कलौरी बर्न करते है। 



तितली सेक्स पोजीशन : तितली सेक्स पोजीशन को साहसी पोजीशन के रूप में ही देखा जाता है इस पोजीशन में सेक्स करने के लिए एक अच्छे मेज की जरूरत आपको पड़ती है जिस पर महिला पार्टनर पीठ करके लेट जाती है और पैरों को पुरुष के कंधे पर रख लेती है और पुरुष पार्टनर लिफ्ट देने के लिए उसके नीचे से पकड़ लेता है ताकि महिला के कूल्हों को ऊपर उठा सके। इस स्थिति में पुरुष का भागफल आगे से प्रवेश करता है और शुक्राणु के योनि के अंदर बेहतर प्रवेश की स्थिति काफी हद तक सुनिश्चित होती है।


इन पोजीशन के अतिरिक्त सेक्स करते हुए जब स्खलन होता है तो स्पर्म की एक बड़ी राशि है योनि के अंदर जाती है और उन शुक्राणुओं को बनाएं रखने के लिए आप पीठ के निचले हिस्से के नीचे कुछ तकिए का प्रयोग कर थोड़ी देर के लिए आप स्थिर रहती है तो यह प्रक्रिया गर्भाधान को अधिक कुशल बनाने का काम करेंगी।
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